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पेशावर जल्मी 255/3 (बाबर 100*, मेंडिस 83, अब्रार 1-44) ने क्वेटा ग्लैडिएटर्स 137 ऑल आउट (जैकब्स 34, रजा 3-9, बसीत 3-26) को 118 रन से हराकर पीएसएल में धमाकेदार जीत दर्ज की।
बाबर का युग फिर से जीवित
पीएसएल के इतिहास में कई मैच होंगे जिनमें भीड़ की उपस्थिति चाही गई हो, लेकिन इस मैच को दर्शकों की जरूरत सबसे ज्यादा थी। यहां उन्हें वह दृश्य देखने को मिलता, जो वे क्रिकेटप्रेमी सबसे अधिक चाहते हैं — बाबर आजम की सफलता और पुष्टि।
बाबर ने 52 गेंदों में नाबाकी शतक लगाकर फिर साबित कर दिया कि वह टी20 क्रिकेट के शीर्ष स्तर पर अभी भी अजेय हैं। यह उनका 12वां टी20 शतक था, जो केवल क्रिस गेल के बाद सबसे ज्यादा है। इस शतक की बदौलत जल्मी ने टूर्नामेंट का उच्चतम स्कोर 255 रन बनाया, जिसने ग्लैडिएटर्स की पारी को लगभग निष्प्रभावी बना दिया।
मेंडिस-बाबर की जोड़ी, गेंदबाजों के लिए आग का तूफान
ग्लैडिएटर्स ने टॉस जीतकर पीछा करने का फैसला किया, लेकिन पहले ओवर के बाद ही उन्हें पछतावा होने लगा। मोहम्मद हरिस ने जहांदाद खान के खिलाफ 22 रन झोंक दिए। उनके आउट होने के बाद मैच का केंद्र बन गए कुसल मेंडिस और बाबर आजम।
इन दोनों ने कराची के मैदान पर ग्लैडिएटर्स की गेंदबाजी की धज्जियां उड़ा दीं। महज 75 गेंदों में 135 रन की साझेदारी ने मध्यक्रम के लिए एक आदर्श प्लेटफॉर्म तैयार कर दिया।
मेंडिस के 44 गेंदों में 83 रन अब पीएसएल के इस सीजन में उनके प्रदर्शन की एक आदत बन चुके हैं, लेकिन बाबर के अंतिम 12 गेंदों में 37 रन बनाने ने मैच को एक नई ऊंचाई दे दी। नॉन-स्ट्राइकर छोड़ने के बजाय, उन्होंने अर्नन हार्डी के साथ ताबड़तोड़ साझेदारी निभाई और अंतिम गेंद पर दो रन लेकर शतक पूरा किया — ऐसा लग रहा था कि यह उनका हक है।
ग्लैडिएटर्स का पतन: जल्मी की गेंदबाजी का जलवा
जल्मी के 255 रन के लक्ष्य के सामने ग्लैडिएटर्स की पारी एक औपचारिकता बनकर रह गई। शमील हुसैन और सऊद शाकिल प्रारंभ में ही झुक गए। मोहम्मद बसीत ने लगातार विकेट लेकर शाकिल और रिली रॉसौ को पेवेलियन भेज दिया। रॉसौ का लगातार खराब प्रदर्शन भी यहां जारी रहा, जब वह शून्य पर आउट हुए।
हसन नवाज, पेस के आगे छक गए और फिर शमील भी अगले ओवर में आउट हो गए। 18 वर्षीय अली रजा ने अपनी 147+ कीमत की तेज गेंदों से ग्लैडिएटर्स को ध्वस्त कर दिया। उनके 3 विकेट महज 9 रन पर थे, जो उनकी प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
चंदीमाल और बेवन जैकब्स के बीच कुछ रन बने, लेकिन यह साझेदारी स्कोरबोर्ड को 137 तक ले जाने तक सीमित रही। मैच के अंत में अली रजा को एक शानदार कैच देकर उन्होंने अपना तीसरा विकेट पाया, जिसने न सिर्फ मैच को निर्णायक बनाया, बल्कि पेशावर जल्मी को टॉप-2 में जगह पक्की करने का मौका भी दे दिया।
अंतिम शब्द
यह मैच न सिर्फ जल्मी की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि एक महान बल्लेबाज कितना बदल सकता है। बाबर आजम ने एक बार फिर साबित किया कि जब वह चाहते हैं, तो वे टीम को अकेले जिता सकते हैं। ग्लैडिएटर्स के लिए यह सीजन अब और भी मुश्किल होता जा रहा है।
