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पेस बांग्लादेश की ताकत होनी चाहिए: शॉन टेट का बड़ा संदेश
बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में पहली बार, पेस आक्रमण वास्तव में एक विकल्प नहीं, बल्कि एक वास्तविक ताकत बन सकता है। और इस बदलाव के पीछे हैं उनके नए पेस बॉलिंग कोच, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तूफानी गेंदबाज शॉन टेट।
एक क्रांति के चेहरे: बांग्लादेश के युवा पेसर
आज की बांग्लादेश टीम में नाहिद राणा, टास्किन अहमद और शोरीफुल इस्लाम जैसे नाम न सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि अपनी तेज गति और आक्रामकता से दुनिया भर के बल्लेबाजों को चुनौती दे रहे हैं। मुस्तफिजुर रहमान के चतुर कटर और लंबी गेंदबाजी के बाहर खड़े अन्य गेंदबाज भी अपने मौके की तलाश में हैं।
टेट ने साफ कहा है कि यह बांग्लादेश के पेस आक्रमण का सबसे मजबूत दौर हो सकता है। और वे इसे केवल एक तकनीकी समीक्षा नहीं बताते, बल्कि एक संस्कृति बदलाव की शुरुआत मानते हैं।
शोरीफुल इस्लाम: आत्मविश्वास और सरलता
शोरीफुल इस्लाम के बारे में बात करते हुए टेट ने कहा, “शोरीफुल ने गेम में सबसे तेजी से अपना अनुकूलन किया। उसने बस अपनी ताकत पर भरोसा रखा। हम हमेशा उससे यही कहते हैं। उसने बहुत साधारण तरीके से गेंदबाजी की, खेल को जटिल नहीं बनाया।”
साथ ही, जब मुस्तफिजुर चोटिल हुए और शोरीफुल को टीम में जगह मिली, तो टेट ने उसके करीब खड़े होकर कहा: “कभी-कभी बहुत ज्यादा नहीं सोचना सबसे अच्छा होता है।”
उन्होंने बताया कि अत्यधिक तैयारी कभी-कभी उल्टा असर डाल सकती है। खासकर जब कोई खिलाड़ी पीएसएल से लौटा हो और फॉर्म में हो, तो वह बस ‘ऑटोपायलट’ पर चलता है।
नाहिद राणा: एक “हथियार”
नाहिद राणा की तारीफ करते हुए टेट ने कहा, “उसे बांग्लादेश टीम में मौका मिलना ही सबसे बड़ी बात थी। उसमें तेज गति, प्रतिभा और क्षमता सब कुछ है।”
पीएसएल में उसके प्रदर्शन की भी उन्होंने तारीफ की, जहां उसने तेज गेंदबाजी से कई बल्लेबाजों को परेशान किया। “युवा तेज गेंदबाज हमेशा चर्चा में रहते हैं। लेकिन तेज गेंदबाजी में दिन भी आते हैं जब आपका दिन नहीं होता।”
फिर भी, टेट ने स्पष्ट किया: “वह एक हथियार है। पिछले महीने पाकिस्तान के खिलाफ हमने यह देखा।”
हैरानी की बात यह है कि टेट ने खुद को राणा से जोड़ा। उन्होंने कहा, “मैं खुद एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आया था। वह भी। मैं शांत स्वभाव का था, वह भी है। हम गेम को जटिल नहीं बनाते। मुझे लगता है हम दोनों एक जैसे हैं।”
टास्किन और मुस्तफिजुर: नेतृत्व की जिम्मेदारी
अनुभवी गेंदबाजों टास्किन अहमद और मुस्तफिजुर रहमान के बारे में टेट ने कहा कि उनकी उपस्थिति टीम में उम्र के हिसाब से एक बेहतरीन संतुलन लाती है।
वे बताते हैं, “मैच से पहले जब हम बॉलिंग मीटिंग करते हैं, तो टास्किन और फिज्ज अब खूब बात कर रहे हैं। यही वह चीज है जो मैं चाहता हूं।”
अपने कोचिंग दर्शन के बारे में बात करते हुए टेट ने कहा, “मैं कम बोलना चाहता हूं। मुझे लगता है मेरे बेहतरीन कोच मेरे साथी खिलाड़ी थे। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के उस दौर में बहुत सारे महान तेज गेंदबाज थे। टास्किन और फिज्ज अब नए खिलाड़ियों के लिए ज्ञान साझा कर रहे हैं। यही मैं यहां चाहता हूं।”
भविष्य की उम्मीद: बांग्लादेश को अपनी ताकत पहचाननी होगी
शॉन टेट ने एक महत्वपूर्ण बात उठाई: “अभी भी यह संस्कृति नहीं बनी कि बांग्लादेश क्रिकेट की ताकत पेस बॉलिंग है। लोग जानते हैं, लेकिन हम अभी तक इसे स्वीकार नहीं कर पाए हैं।”
उनका मानना है कि चाहे पिच की स्थिति कुछ भी हो, बांग्लादेश के पेसर किसी भी मैदान पर अपना असर छोड़ सकते हैं। खासकर पाकिस्तान के खिलाफ पिछली सीरीज के बाद उन्हें यकीन हो गया है कि एक बार विकेट मिल जाए, तो उनका आक्रमण गेम को ही बदल सकता है।
मई 2025 में एंड्रे एडम्स के इस्तीफे के बाद टेट को बांग्लादेश का पेस बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया था। लगभग एक साल बीत चुका है, और वे एक रोमांचक पेस आक्रमण गढ़ने में पूरी तरह लगे हुए हैं।
अब सवाल यह नहीं कि क्या बांग्लादेश के पास अच्छे पेसर हैं, बल्कि यह है कि क्या वे खुद को एक पेस आधारित टीम के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार हैं। शॉन टेट का जवाब स्पष्ट है: “हां, यह अब उनकी सबसे बड़ी ताकत बननी चाहिए।”
