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एक युग का अंत: समिट पटेल ने घरेलू क्रिकेट को कहा अलविदा
क्रिकेट की दुनिया में कहा जाता है कि हर शानदार सफर का एक अंत होता है। इंग्लिश क्रिकेट के सबसे अनुभवी और रंगीले ऑलराउंडरों में से एक, समिट पटेल ने आखिरकार 24 साल के लंबे करियर के बाद घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। पटेल का करियर जितना सफल रहा, उतना ही विवादों और दिलचस्प मोड़ों से भरा रहा।
हैरानी की बात यह है कि उनका संन्यास किसी योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक तकनीकी विवाद का नतीजा था। पटेल ने हाल ही में गोवा में आयोजित ‘वर्ल्ड लीजेंड्स प्रो टी20’ (World Legends Pro T20) लीग में हिस्सा लिया था, जो ECB द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं थी। इस वजह से उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसने 41 वर्षीय पटेल के काउंटी करियर पर प्रभावी रूप से पूर्णविराम लगा दिया। पटेल ने स्वीकार किया कि उन्हें लीग साइन करने से पहले इसकी मंजूरी की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन अब वह इस फैसले के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।
चयनकर्ताओं के साथ तकरार और एक दिलचस्प मोड़
समिट पटेल का अंतरराष्ट्रीय करियर इंग्लैंड के चयनकर्ताओं के साथ खींचतान की कहानी रहा है। उनके 60 अंतरराष्ट्रीय मैचों के सफर में फिटनेस को लेकर अक्सर सवाल उठाए गए। पूर्व चयनकर्ता ज्योफ मिलर ने विशेष रूप से उनकी फिटनेस की आलोचना की थी, जिससे पटेल को हमेशा लगा कि वह अपनी क्षमता से कहीं अधिक मैच खेल सकते थे।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पटेल ने संन्यास के तुरंत बाद इंग्लैंड के राष्ट्रीय चयनकर्ता (National Selector) की खाली सीट के लिए आवेदन कर दिया। इस बारे में बात करते हुए पटेल ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यह बस एक सहज बात थी। मैंने रॉब की को फोन किया और कहा कि मैं फिलहाल खाली बैठा हूं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि मैं इस भूमिका के लिए आवेदन क्यों नहीं करता? मैंने कहा, ठीक है, मुझे फॉर्म भेजें और मैं आवेदन कर देता हूं।” हालांकि वह जानते हैं कि उनके चुने जाने की संभावना कम है, लेकिन यह कदम उनके बेबाक व्यक्तित्व को दर्शाता है।
करियर की उपलब्धियां: पांच फॉर्मेट, एक नाम
भले ही चयनकर्ताओं के साथ उनकी पटरी न बैठी हो, लेकिन पटेल की लंबी उम्र और निरंतरता निर्विवाद है। 2002 में एक किशोर के रूप में नॉटिंघमशायर के लिए पदार्पण करने से लेकर पिछले साल नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स के लिए अपने आखिरी मैच तक, उन्होंने 913 पेशेवर मैच खेले। सबसे खास बात यह है कि वह इंग्लिश घरेलू क्रिकेट के पांच अलग-अलग फॉर्मेट (चार-दिवसीय, 50-ओवर, 40-ओवर, टी20 और द हंड्रेड) में ट्रॉफी जीतने वाले दुर्लभ खिलाड़ियों में से एक हैं।
केविन पीटरसन और भारत में ऐतिहासिक जीत का किस्सा
पटेल के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2012-13 में भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज की जीत था। इस जीत में केविन पीटरसन (KP) की बड़ी भूमिका थी। पटेल याद करते हैं कि उस समय पीटरसन ने उन्हें फिट न होने के बावजूद टीम में जगह दिलाई थी।
पटेल ने खुलासा किया कि जब टीम अहमदाबाद में 1-0 से पिछड़ रही थी, तब एक “बड़ी टीम मीटिंग” हुई जिसने पूरा माहौल बदल दिया। उन्होंने बताया, “हमने उस मैच के बाद कुछ बीयर पी और तय किया कि हम अब भारत को गेम कंट्रोल नहीं करने देंगे। पीटरसन ने कहा कि अगर हमें हारना भी है, तो हम लड़ते हुए हारेंगे। इसी मानसिकता ने हमें मुंबई में जीत दिलाई, जहां हमने भारत को धूल चटाई थी।” हालांकि उस निर्णायक टेस्ट में पटेल केवल चार ओवर डाल पाए क्योंकि पिच पूरी तरह से ‘डस्टबोउल’ बन चुकी थी, लेकिन भारत को उनके घर में हराने का संतोष उनके लिए अविस्मरणीय है।
2017 का जादुई साल और नॉटिंघमशायर का दबदबा
पटेल के लिए 2017 की गर्मी सबसे यादगार रही। उस साल उन्होंने नॉटिंघमशायर को 50-ओवर और टी20 डबल खिताब दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। साथ ही, चैंपियनशिप में उन्होंने लगातार दो दोहरे शतक जड़े, जिससे टीम को डिवीजन टू से प्रमोशन मिला।
उनका एक पसंदीदा किस्सा चेल्म्सफोर्ड में 50-ओवर सेमीफाइनल का है, जहां टीम को 371 रनों का विशाल लक्ष्य मिला था। पटेल मुस्कुराते हुए बताते हैं कि विपक्षी टीम के खिलाड़ी हाफ-टाइम तक यह मान चुके थे कि वे जीत गए हैं। पटेल ने कमान संभाली और स्टीवन मुलाने के साथ मिलकर 185 रनों की साझेदारी की और तीन गेंद शेष रहते जीत हासिल की।
भविष्य की राह: कोचिंग और पारिवारिक सपने
अब जब काउंटी क्रिकेट का अध्याय समाप्त हो गया है, पटेल अपनी नजरें कोचिंग पर टिकाए हुए हैं। वह ‘ट्रेंट रॉकेट्स’ के कोचिंग स्टाफ के साथ काम करना चाहते हैं और अपने मेंटॉर पीटर मूर के मार्गदर्शन में टीम में मूल्य जोड़ना चाहते हैं।
खेल के प्रति उनका जुनून अभी भी बरकरार है। वह शनिवार को होयलैंडस्वेन सीसी (Hoylandswaine CC) के लिए क्लब क्रिकेट खेलते रहेंगे। लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना अपने 12 वर्षीय बेटे राहिल के साथ एक ही टीम में खेलना है। राहिल भी अपने पिता की तरह दाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिनर हैं।
अपने 25 साल के सफर को याद करते हुए पटेल ने भावुक होकर कहा, “अगर कोई मुझसे कहता कि मैं 25 साल तक खेलूंगा, तो मैं खुशी-खुशी इस पर सहमत हो जाता। लेकिन हर चीज का एक अंत होता है।” समिट पटेल का करियर न केवल आंकड़ों का खेल था, बल्कि यह खेल के प्रति उनके अटूट जुनून और अपनी शर्तों पर जीने की कहानी थी।
