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एशेज की तैयारी पर गरमाया विवाद
पर्थ के लिलाक हिल में इंग्लैंड के एकमात्र वार्म-अप मैच से पहले एशेज की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इंग्लैंड के सहायक कोच मार्कस ट्रेस्कोथिक ने अपनी टीम की सीमित वार्म-अप मैचों की रणनीति का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने इसे आधुनिक क्रिकेट का एक अभिन्न हिस्सा बताया है।
बदलते दौर की बदलती जरूरतें
ऐतिहासिक रूप से, एशेज जैसी बड़ी सीरीज से पहले पर्यटक टीमें ऑस्ट्रेलिया में कई प्रथम श्रेणी वार्म-अप मैच खेलती थीं। हालांकि, बढ़ते व्यस्त कार्यक्रम और क्रिकेट की अधिकता के कारण अब टीमों ने इन दौरों को छोटा करना शुरू कर दिया है। ट्रेस्कोथिक के अनुसार, वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का शेड्यूल इतना व्यस्त है कि दो या तीन प्रथम श्रेणी मैच खेलने का समय ही नहीं मिलता। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीमें अब सीमित अभ्यास मैचों और नेट सत्रों के जरिए ही खुद को तैयार करने की आदी हो चुकी हैं।
क्या ये वाकई कम तैयारी है?
इंग्लैंड की इस रणनीति पर पूर्व कप्तान माइकल वॉन और इयान बॉथम जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं। बॉथम ने तो इसे ‘अहंकार’ की हद तक की तैयारी बताया है। आलोचकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की टीम शेफील्ड शील्ड के जरिए जो तैयारी कर रही है, उसके मुकाबले इंग्लैंड का एक वार्म-अप मैच नाकाफी है।
हालांकि, ट्रेस्कोथिक इन आलोचनाओं से असहमत हैं। उनका मानना है कि इंग्लैंड की टीम ने पिछले पांच विदेशी दौरों (भारत, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड) में जिस तरह की शुरुआत की है, वह उनकी तैयारी के तरीकों की सफलता को दर्शाता है। वे कहते हैं, ‘हम मौजूदा परिस्थितियों से बहुत खुश हैं। हमारे पास नेट अभ्यास की अच्छी सुविधा है और हम ऑप्टस स्टेडियम में भी पर्याप्त तैयारी करेंगे।’
खिलाड़ियों का क्या है नज़रिया?
सलामी बल्लेबाज बेन डकेट ने भी अपनी टीम के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। डकेट का मानना है कि उन्हें खेल के समय की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमारा हालिया समर सीजन बहुत व्यस्त रहा है। मुझे नहीं पता कि तैयारी का सही पैमाना क्या है, लेकिन अगर हम नेट्स में जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड जैसे गेंदबाजों का सामना कर रहे हैं, तो यह किसी भी मैच अभ्यास से बेहतर तैयारी है।’
भविष्य की चुनौतियां
अगले शुक्रवार से ऑप्टस स्टेडियम में शुरू होने वाले पहले टेस्ट के लिए इंग्लैंड की रणनीति साफ है। वे पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक ट्रेनिंग और खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया की पिचें और वहां का उछाल इंग्लैंड के लिए कड़ी परीक्षा साबित हो सकता है, लेकिन टीम प्रबंधन को अपनी तैयारियों पर पूरा भरोसा है।
निष्कर्ष
एशेज का रोमांच हमेशा से ही हाई-प्रोफाइल होता है और किसी भी टीम के लिए तैयारी का तरीका बहस का विषय हो सकता है। क्या इंग्लैंड का ‘आधुनिक तरीका’ ऑस्ट्रेलिया की मजबूत घरेलू तैयारी पर भारी पड़ेगा? यह तो आगामी टेस्ट सीरीज ही तय करेगी। लेकिन फिलहाल, इंग्लैंड की टीम अपने दृष्टिकोण पर अडिग है और अपने खिलाड़ियों की क्षमता पर भरोसा जता रही है।
क्रिकेट प्रशंसक इस सीरीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जहां रणनीति और कौशल का असली मुकाबला देखने को मिलेगा।
