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मध्यक्रम की विफलता: बांग्लादेश की हार ने उजागर की बल्लेबाजी की गंभीर खामियां
शुक्रवार को ढाका में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मैच में बांग्लादेश की हार ने एक बार फिर टीम के मध्यक्रम की कमजोरियों को सबके सामने ला दिया है। यह मैच बांग्लादेश के लिए एक नियमित लक्ष्य का पीछा करने जैसा था, लेकिन मध्य ओवरों में बल्लेबाजी की धीमी रफ्तार ने उन्हें भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर दिया। अंततः, बांग्लादेश की पूरी टीम 48.3 ओवरों में 221 रनों पर सिमट गई और न्यूजीलैंड ने 26 रनों से जीत दर्ज की।
शुरुआती मजबूती और लिटन दास का अधूरा सपना
मैच की शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि बांग्लादेश आसानी से जीत दर्ज कर लेगा। 23वें ओवर तक टीम का स्कोर 114 रन पर 2 विकेट था, जो एक बहुत ही आरामदायक स्थिति थी। सैफ हसन और लिटन दास के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई। सैफ हसन ने अपनी दूसरी वनडे अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन वह इसे बड़े स्कोर में नहीं बदल सके और जल्द ही आउट हो गए।
दूसरी ओर, लिटन दास एक बार फिर अपने पुराने पैटर्न का शिकार हुए। वह 46 रन बनाकर आउट हुए, जो लगातार तीसरा मौका है जब वह 40 के स्कोर में आउट हुए हैं। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने शानदार वापसी की और महज पांच ओवरों के भीतर इन दोनों सेट बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर मैच का रुख बदल दिया।
मध्य ओवरों का ‘टैस्ट मैच’ जैसा दृष्टिकोण
असली समस्या तब शुरू हुई जब तौहीद হৃদয় और अफीफ हुसैन क्रीज पर आए। इन दोनों बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के खिलाफ एक वनडे मैच में टेस्ट मैच की तरह बल्लेबाजी करना शुरू कर दिया। दोनों ने मिलकर 13.1 ओवरों में 52 रन जोड़े, लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि इस पूरी साझेदारी में केवल एक चौका लगा।
- अफीफ हुसैन: 59 गेंदों में केवल 27 रन बनाए।
- तौहीद हृदय: साझेदारी में 24 रनों का योगदान दिया।
इस धीमी बल्लेबाजी का सीधा असर आवश्यक रन रेट (Required Run Rate) पर पड़ा। जब यह जोड़ी 28वें ओवर में साथ आई थी, तब रन रेट 5.13 था, लेकिन जब 41वें ओवर में अफीफ आउट हुए, तब यह बढ़कर 7.11 हो गया था। इस दबाव ने बांग्लादेश के निचले क्रम को पूरी तरह से बिखेर दिया।
खिलाड़ियों का फॉर्म और दर्शकों का आक्रोश
कप्तान मेहदी हसन मिराज आमतौर पर धीमी शुरुआत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस मैच में उनकी धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए घातक साबित हुई। वहीं, रिशाद हुसैन की बल्लेबाजी का ग्राफ पिछले दो वर्षों में काफी गिरा है। शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का धैर्य जवाब दे गया और जब अफीफ और हृदय ने रन बनाने में असमर्थता दिखाई, तो स्टेडियम में उनके खिलाफ शोर और हूटिंग सुनाई देने लगी।
पिच की चुनौती या कौशल की कमी?
मैच के बाद सैफ हसन ने पिच की स्थिति पर बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि विकेट शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण था। लेकिन हमने गलत समय पर अपने विकेट गंवाए। अगर मैं अपनी पारी को थोड़ा और लंबा खींच पाता, तो यह आसान होता। पिच थोड़ी असमान थी, लेकिन मैं इसे बहाना नहीं बनाना चाहता। सेट बल्लेबाज के लिए यह आसान था, लेकिन नए बल्लेबाज के लिए मुश्किल था। हमें परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत थी।”
सैफ ने आगे पाकिस्तान सीरीज का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की पिचें अधिक सच्ची (True) थीं, जबकि यहां अनुकूलन (Adaptation) की कमी दिखी।
कोच की चिंता और भविष्य की राह
बांग्लादेश के मध्यक्रम की यह समस्या नई नहीं है। पिछले 12 महीनों से टीम इस समस्या से जूझ रही है। कोच फिल सिमंस ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया था कि घरेलू क्रिकेट में मध्यक्रम के अधिकांश बल्लेबाज वास्तव में टॉप-ऑर्डर बल्लेबाजों के रूप में खेलते हैं। यही कारण है कि जब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीच के ओवरों में प्रमोट किया जाता है, तो वे स्ट्राइक रोटेट करने और आक्रामक खेलने की क्षमता नहीं दिखा पाते।
इसके साथ ही, नजमुल हुसैन शांतो के फॉर्म में आई गिरावट ने टीम की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। अफीफ और मेहदी पर अब विशेष रूप से दबाव है कि वे अपनी भूमिका को समझें और टीम को एक आधुनिक वनडे टीम की तरह आगे ले जाएं। यदि बांग्लादेश को भविष्य के मैचों में जीत हासिल करनी है, तो उन्हें अपने मध्यक्रम की इस ‘सुस्ती’ को दूर करना होगा।
