आईपीएल 2026: मुंबई इंडियंस का संघर्ष और प्रबंधन की चूक
आईपीएल 2026 का सीजन मुंबई इंडियंस (MI) के प्रशंसकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। हार्दिक पांड्या की कप्तानी में पांच बार की चैंपियन टीम अपने शुरुआती नौ मैचों में से सात मैच हार चुकी है। हालांकि गणितीय रूप से टीम अभी भी दौड़ में है, लेकिन प्लेऑफ की राह उनके लिए नामुमकिन सी नजर आ रही है। गुजरात टाइटन्स, दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स जैसी टीमें उनसे काफी आगे निकल चुकी हैं।
क्या रोहित शर्मा के बाद सब कुछ बदल गया?
2020 में रोहित शर्मा की कप्तानी में पांचवां खिताब जीतने के बाद से ही मुंबई इंडियंस का ग्राफ नीचे गिरता गया है। रोहित की जगह हार्दिक पांड्या को कमान सौंपने का फैसला भी टीम के लिए कारगर साबित नहीं हुआ। पांड्या की कप्तानी में टीम ने 37 मैचों में से 22 में हार का सामना किया है। केवल कप्तानी ही नहीं, बल्कि टीम प्रबंधन द्वारा संसाधनों का सही इस्तेमाल न कर पाना भी इस पतन का बड़ा कारण है। आज हम ऐसे तीन खिलाड़ियों की बात करेंगे, जिन्हें रिटेन न करना MI के लिए सबसे बड़ी भूल साबित हुई।
1. टिम डेविड: एक घातक फिनिशर का नुकसान
टिम डेविड 2022 से 2024 तक मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे। उन्होंने 171.35 के स्ट्राइक रेट से 658 रन बनाए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रिटेन नहीं किया गया। आरसीबी (RCB) में शामिल होने के बाद, डेविड ने खुद को एक मैच-विनर के रूप में साबित किया है। दूसरी ओर, मुंबई इंडियंस इस सीजन में एक मजबूत फिनिशिंग यूनिट बनाने में पूरी तरह नाकाम रही है। शेरफेन रदरफोर्ड और मिचेल सेंटनर जैसे खिलाड़ी टीम को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे पाए, जिससे डेथ ओवरों में टीम का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है।
2. जोफ्रा आर्चर: फिटनेस और फॉर्म का असर
जोफ्रा आर्चर को 2022 में जसप्रीत बुमराह के साथी के रूप में लाया गया था। फिटनेस समस्याओं के कारण उन्हें टीम से बाहर किया गया, लेकिन राजस्थान रॉयल्स में जाते ही उनकी किस्मत बदल गई। आईपीएल 2026 में आर्चर ने 14 के शानदार स्ट्राइक रेट से 10 मैचों में 15 विकेट चटकाए हैं। वहीं, मुंबई इंडियंस का पेस अटैक पूरी तरह से बेअसर नजर आया है। बुमराह को छोड़कर बाकी गेंदबाज पावरप्ले में विकेट नहीं ले पा रहे, जिससे विपक्षी टीमों को अच्छी शुरुआत मिल रही है।
3. अंशुल कंबोज: चेन्नई की सफलता, मुंबई की चूक
अंशुल कंबोज को मुंबई इंडियंस ने 2024 में मौका दिया था, लेकिन पर्याप्त अवसर न मिलने के कारण उन्हें रिलीज कर दिया गया। चेन्नई सुपर किंग्स ने मौके का फायदा उठाया और आज कंबोज पर्पल कैप की रेस में सबसे आगे हैं। 25 वर्षीय इस गेंदबाज ने इस सीजन में 17 विकेट लिए हैं। दूसरी तरफ, मुंबई ने दीपक चाहर और शार्दुल ठाकुर जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर 11.25 करोड़ रुपये खर्च किए, जो अपने करियर के ढलान पर हैं। अगर MI ने कंबोज पर भरोसा दिखाया होता, तो आज उनकी गेंदबाजी इकाई की तस्वीर कुछ और होती।
निष्कर्ष
मुंबई इंडियंस का यह सीजन प्रबंधन की दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है। खेल में केवल बड़े नाम मायने नहीं रखते, बल्कि सही समय पर सही खिलाड़ी का चुनाव ही एक टीम को चैंपियन बनाता है। क्या मुंबई इंडियंस अगले सीजन में अपनी इन गलतियों से सीख लेगी? यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल प्रशंसकों के लिए यह सीजन एक निराशाजनक याद बनकर रह गया है।
