रविचंद्रन अश्विन और मंकड़िंग विवाद का सच
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में अपने लंबे और शानदार IPL करियर को अलविदा कहा है। 2009 से शुरू हुआ यह सफर 2025 में समाप्त हुआ, जिसमें अश्विन ने 221 मैचों में 187 विकेट और 833 रन बनाए। हालांकि, उनके पूरे करियर में एक घटना ऐसी रही जिसने क्रिकेट जगत में तूफान खड़ा कर दिया था—2019 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ जोस बटलर को ‘मंकड़’ करना।
विवाद की जड़: क्या था वह पल?
IPL 2019 में जयपुर के मैदान पर किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबला था। जोस बटलर शानदार लय में थे और जीत की ओर बढ़ रहे थे। तभी गेंदबाजी कर रहे अश्विन ने गेंद फेंकने से पहले ही बटलर को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज से बाहर निकलते देख गिल्लियां बिखेर दीं। तीसरे अंपायर ने बटलर को आउट करार दिया और यहीं से मैच का पासा पलट गया। पंजाब ने यह मैच 14 रन से जीत लिया।
अश्विन का बेबाक अंदाज: जीत ही प्राथमिकता है
हाल ही में ‘जियो हॉटस्टार’ पर बातचीत के दौरान अश्विन ने इस घटना पर सफाई देते हुए कहा, “बहुत से लोग चरित्र और खेल भावना की बात करते हैं। जब लोग इसे गलत बताते हैं, तो मेरा मन इसे और करने का करता है। अगर ICC को लगता कि यह ईमानदारी की समस्या है, तो वे इसे नियमों में क्यों रखते?”
अश्विन ने आगे कहा, “लोग कहते हैं कि मैंने यह केवल जीतने के लिए किया। बिल्कुल, मैंने जीतने के लिए ही किया था। इसमें शर्म की क्या बात है? मैंने अपनी टीम से कहा था कि बाहरी शोर की चिंता मत करो, मैं मीडिया को संभाल लूंगा, हमें बस यह मैच जीतना है। हम जीते और वह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण था।”
पंजाब की कप्तानी और उससे मिली सीख
अश्विन ने अपने कप्तानी के सफर के बारे में भी बात की। 2018 में पंजाब की कप्तानी संभालना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। हालांकि, वे टीम को वैसी सफलता नहीं दिला सके जैसी उम्मीद थी, लेकिन अश्विन का मानना है कि उन दो वर्षों ने उन्हें एक खिलाड़ी के रूप में बहुत कुछ सिखाया।
एक ऐतिहासिक करियर का समापन
रविचंद्रन अश्विन का सफर केवल IPL तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से भी संन्यास ले लिया। टेस्ट क्रिकेट में 537 विकेट और 3503 रन के साथ वे भारत के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। 2011 विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतना उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा।
निष्कर्ष
चाहे आप अश्विन के ‘मंकड़’ करने के तरीके से सहमत हों या न हों, यह स्पष्ट है कि वे खेल के नियमों की बारीकी को समझते हैं। उन्होंने हमेशा खेल को जीतने के नजरिए से देखा है, न कि केवल लोकप्रियता के लिए। उनका क्रिकेट करियर खेल के प्रति उनके समर्पण और कड़े फैसलों को लेने की हिम्मत का एक बेहतरीन उदाहरण है।
