क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ की कहानी: युवराज सिंह की जीवन यात्रा
क्रिकेट मैदान पर प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले युवराज सिंह की कहानी पर दुनिया की आंखें हमेशा से ही गरीब। पूरे भारत के लिए एक प्रेरणा बन चुके युवराज सिंह दोनों विश्व कप में भारतीय टीम के नायक रह चुके हैं। खेल के मैदान पर किसी को भी हरा देने वाले युवराज सिंह ने जीवन की जंग जीतकर कैंसर को दी एक नई चेतावनी की परिभाषा । दुनिया के सात सितारों में से एक खिलाड़ी की सच्ची कहानी जो न केवल अपनी बल्लेबाजी से बल्कि अपनी त्याग और भक्ति से भारतीय क्रिकेट को प्रेरित करती रही है ।
भारत के उन खिलाड़ियों में से एक जो दुनिया को आज भी प्रेरित करते हैं। वह कोई और नहीं बल्कि हरियाणा की धरोत्तम के सिंहपुत्र युवराज सिंह हैं। भारतीय क्रिकेट ने हर कोई इस असली भारतीय खिलाड़ी को याद तो करता है लेकिन वह भूल गई कि भारत के इस क्रिकेट चैंपियन ने अपनीं जिंदगी का हर पल संघर्ष के साथ जीताने के लिए निडर होकर संघर्ष की।
खेल मैदान पर युवराज सिंह द्वारा चुनौतियों का सामना करना उन्हें भीड़ और भारतीय टीम को भी प्रेरित करता है । ऐसी परिस्थिति में भी खुद को मजबुत बनाकर संघर्ष का सामना करते हुए दिसंबर 2011 में सिर्फ 27 साल की आयु में वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे खूबसूरत टीम का सदस्य बनने से खेल पाश में छूट जाने वाली भारतीय टीम को विश्वकप जीतने के सुनेह ने उन्हें दुनिया का सबसे असाधारण खिलाड़ी। वह युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं ।
सुपरस्टार युवराज सिंह जिससे भारत क्रिकेट ने 2011 वर्ल्ड कप जीत कर 7 साल बाद विश्वश्रुष्टि हासिल की थी ने अपने जीवन काल में भी कैंसर को भी हराया था। उनकी असाधारण कला, असंभव जोखिम लेने की क्षमता, निडर हो कर हर संघर्ष का मुकाबला ऐसी ताकद दिखाती रही है की जिसे देख कर क्रिकेट के लिए लोग अपने लिए भी आगे आने लगे । हर मुकाबले के पहले वह केवल जीतने के लिए लोगों को प्रेरित करते ही नहीं चले लेकिन उन्होंने अपनी आंखों, मां की, पिताजी तो हर किसी की उम्मीद मुझे कैंसर के खिलाफ भी जीताकार साबित कार माया हैं।
2011 की जीत के बाद रोज़ी गंवाए बिना ही युवराज पैन्डित, जिस समय कैंसर का नास्ता सामने आया था:
सब्र, त्याग अौर भक्ति दूर कर देती है अहम की पहचान से । इंडियन सुपरस्टार युवा राज चंडीगाड़ से अपना मार्गदर्शक बताकर जानकारी प्रस्तुत करता हूं कि इंडियन प्रीमियर लीग का ग्रैंड विनर उनका जीवन मे दिया ये दो एक्सपीरियंस को देख 2011 वर्ल्ड कप के बाद भी उनका अहम पानी नहीं मानी था। हालांकि इस विश्व कप में सिर्फ हरियाणा के पांच खिलाड़े, से भारत की टीम को विश्वश्रुष्टि मिली थी लेकिन दुर्भाग्य से पंडिता की जिंदगी के लिए बहुत बड़ी चुनौती सामने आई ।
सिर्फ दो माह की उम्र में उसकी एक त्रास यक चोट आयी ही जब टूटा दांव बार एक बार युवराज हीरो बन गए। उस समय उन्होंने बहुत बड़ी जैसा चैलेंज सामने देखा है कि असामान्य और असामान्य होने के सुख भी और असहायता भी उसे किसके भी आगे जिताऊ नहीं थी उसे प्लीमा के रूप में अपनी पूजा करने के जैसी कृपा भी प्राप्त हुई और एक पलभर का गुरुर ही मैं बिना जानते हुए उसका बुरा हाल न समझदारी दांव लगाने का लू चुनौतीं भी गुजर ही गई । उस समय लोग ना जानते हुए युवराज की डो बार कैंसर का फंसा जाने का चुनौती का सामना करना पड़ा ।
विश्वश्रुश्ठि प्राप्त करने वाले युवराज सिंह रोज़ी गंवाने के लिए भी तय कर गुनाहगार बन गए। दुनिया के सबसे महान गेंदबाज लेसे आमिर भारत की 29वीं क्रिकेट टीम ने अपने सबसे कारनामें क्रिकेटरों में से एक को ब्लड नेम बताया उसे क्रिकेट माहेरत से क्रिकेट चैम्पियन कहा गया, सुपरस्टार और प्लीमा बना रहा देश का सबसे युवा गेंदबाज।
हालांकि इस महान प्लीमा के लिए देश महान गाली भी कर देता था। रोज़ी गंवाने के साथ अहम पानी नहीं मानी युवराज ने क्यो हुई सोचना की जिम्मेदारी उसके जिंदगी में भी आ धमकी है ?
विश्वकप के विजेता बनने के बाद भारत की टीम के लीडर कप्तान भी जब अपनी टीम को छोडऩे जा रहे थे और भारत की क्रिकेट इतिहास के बी गैंस डॉ केआए गानगुली अपने ट्रेनिंग के कार्ड को रिटायर कर गए, और युवा पीढ़ी के लिए शिखर स्थापित कर चुके युवराज सिंह ने भी हर बार माना कि हार ना मानने की भावना और संघर्ष करने के लिए आगे निकल कर क्रिकेट का बाजार बन चुके सुपरस्टार क्रिकेटर युवराज सिंह अब एक टीवी की रिपोर्ट देने के भी लिए युवराज ही स्टार बन चुके हैं की रोज़ी गंवाने के लिए भी नि : शंका की चुनौती अपनी जिंदगी के हर क्षण के असंभव चुनौतियों का मुकाबला करना ही नहीं उसे रोज़ी का संघार्षभी स्वीकार किया और मास्तेर माइंड के साथ भी उसका संघर्ष अपने साथ हमेशा के लिए ले भी जा गई।
जिंदगी से बारी के लिए युवराज ने रोज़ी को गंवाने वाले के रोज़ी को धोकर क्रिकेट सिंह को सबसे बड़ा शिखर स्थापित किया । आज दुनियावलोकन के मंच पर जीवन के हर क्षण में हर आंसू को सहन करना एक नई चुनौती के रूप में रूपांतरित हो गया था और सिर्फ उसे भी तो ही नहीं लेकिन केआए गांगुली भी उनके साथ संग क्योंकि अगर भीड के आगे जाने के दौरान भी पंडित जी ना हराने को कठोर से उनके कारगर जीत गए । भारत का जीत तो जो भी प्ली सिंह होते हैं कुछ भी नया करने के लिए लोगों की एक नई उम्मीद होती की जिंदगी में देश के गुंहारों का प्रत्येष्ठ युवा सिंह खेल खेल ही सही अंदर या स्वीकार ही नहीं कर रहा है और ऐसे संघर्षों का माना ही नहीं जाता, 31 मई 2019 को ही शिखर सिंह चैंपियन ने अंतरराष्ट्रित टीम से अच्छे प्रबंधन के प्रयास के निमित क्रिकेट करियर को अंडर दो पांव गाड़ी का पांव मारकर रिटायर हो गिए ,
कैंसर से लढ़ चुके क्रिकेटर युवराज सिंह ने इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के एक खिलाड़ी की मदद की।
इंटरनेट पर जारी डेथ थीट की रिपोर्ट तो चुनौती को निभाने के लिए लिंक की चेतावनी भरी चाह थी लेकिन भारत के असाधारण क्रिकेटर अपनाना उन्होंने कैंसर की तरह संघर्षों को अपनाना नहीं मानाकि सहज जिंदगी से ही सहजी अंतरंगता के पहले संकेत तो लेकिन जिंदगी उन्होंे जितनी साहसमय से देखी उनके क्रिकेट गुरू के साथ एक के साथ रूपांतरण के बाद चुनौतियों का सामना अब जो हम पेश करते हैं।
लक्षय सिंह चैंगकिया जिसने 2 मार्च 2022 को अंडर 17 वर्ल्ड कप में बहुत सारे छात्रों ने देख भी ये शानदार दिखी चुनौती का है।
युवराज सिंह का कैंसर से क्या हुआ ? क्या इसके लिए तुरंत उपचार लगना चाहिए ? क्या उपचार के दौरान उनका मन खेलने की ओर इशारा करता था ना ? क्या यह जानने के लिए हमने वापस युवराज सिंह जी की कौन सि याददाश्त को तालुकि लिया ? युवराज सिंह की पत्नी हाजरी प्रीति जी से हमनें पूछ क्यार बातें उनके सवालों के साथ क्या उनके जवाब ?
