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सूर्यकुमार यादव: टीम इंडिया में ‘सभी आधार कवर’ नहीं होता

टी20 विश्व कप 2024 जीतने के बाद से भारत ने अब तक सातों टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीत ली हैं। इस दौरान टीम का विजय-पराजय रिकॉर्ड 26-4 रहा है। घर में दो बाइलेटरल सीरीज अभी भी बाकी हैं, जहाँ भारत तीन महीने में अपना ताज बचाएगा। अनुभव, क्षमता और रिकॉर्ड को देखते हुए वे स्पष्ट पसंदीदा हैं, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव का मानना है कि क्रिकेट में कभी भी ‘सभी आधार कवर’ होने का सवाल नहीं उठता।

टीम की ताकत, लेकिन घमंड नहीं

ब्रिस्बेन में मैच बारिश के कारण रद्द होने के बाद सूर्यकुमार यादव ने कहा,

“मुझे अलग-अलग क्षमताओं वाले इन सभी लड़कों के साथ खेलने का अवसर मिल रहा है, जो मैं वाकई बहुत भाग्यशाली हूँ। वे मैदान पर अलग-अलग चीज़ें लाते हैं। जब हम बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग के बारे में बात करते हैं, तो मैदान पर ऊर्जा का अहसास होता है। जब सब एक साथ खेलते हैं, तो लोगों को खेल में मजा आता है।”

अनुभव का महत्व

सूर्यकुमार ने जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज की उपस्थिति को टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया।

“गेंदबाजी के मामले में भी लोग जिम्मेदारी ले रहे हैं। बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ी की टीम में मौजूदगी बहुत अच्छी बात है। हर कोई उनसे बात करता है, खेल की चाल-बाजियाँ सीखता है। इससे टीम के भीतर बहुत अच्छी दोस्ती भी बन रही है।”

अभिषेक शर्मा: तेजी से सीखने वाला युवा सितारा

टूर के दौरान अभिषेक शर्मा ने टी20आई में 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड सबसे कम गेंदों में पूरा कर लिया। उन्होंने एक मुकाबले में धीमी पिच को समझकर संयमित पारी खेली और टीम को 167 रनों का सफल बचाव करने में मदद की।

सूर्यकुमार ने अभिषेक की लचीलापन की तारीफ करते हुए कहा,

“जब पिच मुश्किल होती है, तो तुरंत ढल जाना जरूरी है। कभी-कभी तो एक बाघ को भी शाकाहारी बनना पड़ता है!”

उन्होंने जोड़ा, “आज पिच अच्छी थी, इसलिए वे सामान्य तरीके से खेले और 4.5 ओवर में 50+ रन बना लिए। लेकिन पिछले मैच में पिच को समझना बहुत जरूरी था, और इन दोनों ने — अभिषेक और शुभमन गिल — बहुत अच्छा किया।”

संचार और विश्वास की भाषा

सूर्यकुमार ने युवा बल्लेबाजों के संचार और तेजी से सीखने की क्षमता की भी सराहना की।

“वे अच्छी तरह संवाद करते हैं, दौड़ते हैं और तेजी से सीख रहे हैं। केवल 120 गेंदों का खेल है, लेकिन कई बार आपके पास उतना समय होता है जितना लगता है। अगर वे परिस्थितियों को समझने में 4-5 गेंदें अधिक लेते हैं, तो भी उनके पास कौशल है कि वे आसानी से पकड़ बना लेते हैं।”

अभिषेक शर्मा का विश्वास

अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय टीम प्रबंधन की दी गई आजादी को दिया। उन्होंने कहा,

“मुझे पता था कि यहाँ अतिरिक्त बाउंस और तेज गति होगी, लेकिन टीम के रूप में मेरी योजना यही थी कि मैं वही खेल जारी रखूँ जो मैंने पहले से खेला है। मैं ओपनर के तौर पर अपनी भूमिका अच्छी तरह समझता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “जब आप विरोधी को दबाना चाहते हैं, तो आपके पास आत्मविश्वास और क्षमता दोनों होने चाहिए। कप्तान और कोच ने मुझे हमेशा समर्थन दिया। मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में व्हाइट-बॉल क्रिकेट में उन्हें हराना आसान नहीं है।”

निष्कर्ष: नम्रता और लगातार सीख

सूर्यकुमार यादव के शब्द स्पष्ट थे: “हम वहाँ तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन क्रिकेट में कभी भी सभी आधार कवर होने की बात नहीं होती। हम हर मैच से सीखते हैं। अभी तक सब कुछ अच्छा लग रहा है, इंशाअल्लाह ऐसे ही चलता रहे।”

यह नम्रता और निरंतर सीखने की भावना टीम इंडिया को अगले चुनौतीपूर्ण टूर्नामेंट के लिए तैयार रखेगी।

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By Aaryav Bennett

Aaryav Bennett is a cricket content specialist covering live match updates, scorecards, and player stats. He focuses on detailed match reporting.

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