2011 विश्व कप की यादें अभी भी ताजगी के साथ बसती हैं
2011 का विश्व कप भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक पल था। 28 साल की प्रतीक्षा के बाद भारत ने इंग्लैंड में विश्व कप अपने नाम किया। एमएस धोनी के नेतृत्व में टीम ने अपनी नायाब खेल नीति के साथ विश्व कप जीत लिया। विश्व कप के बाद से यह विजयी भारत को देखना किसे पसंद नहीं आएगा।
रोहित शर्मा की चुनौतियां
विश्व कप जीत के समय रोहित शर्मा का बीड़ा शायद सबसे अधिक था। 23 साल के उम्र में ही वह अपनी कौशल का दिखावा करते हुए आए थे। लेकिन यह तय नहीं था कि क्या वह 2011 विश्व कप के मैदान पर आ पाएंगे। रोहित शर्मा को वह मौका नहीं मिला था। साल 2011 विश्व कप का समय था जब रोहित शर्मा को टीम में चुना नहीं गया था। आज वही टीम ने धोनी के नेतृत्व में विश्व कप जीता।
रोहित शर्मा और धोनी: एक अनजान दोस्ती
रोहित शर्मा जैसा कि हम जानते हैं तो वह एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं। वह इतनी जल्दी से आइए थे और अपनी क्षमता से सभी को प्रभावित करने लगे। उनकी उपलब्धि देखकर शायद यह तय होना मुश्किल था कि वे टीम में नहीं चुने गए थे। रोहित शर्मा ने कभी भी इस बात को उजागर नहीं किया कि उनकी चुनौतियां कितनी बड़ी थी।
व्यस्त चयन बोर्ड
टीम के चयन और रोहित शर्मा के बारे में आज भी कई सवाल हैं। टीम किसकी चुनती है उसके और कई कारक हैं। लेकिन इस विश्व कप में भारत की चयन कमेटी के कई क्लासिक गलती हुई थी। जिसके कारण धोनी की कप्तानी वाली टीम ने 28 साल की प्रतीक्षा के बाद यह अजेय उपहार जीता।
भारत vs भारत- रोहित शर्मा का सफर
रोहित शर्मा ने भी केवल चार साल का ही समय हुआ था। उन्होंने भारत के लिए पहली बार 2007 में ही अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। क्रिकेट में टेस्ट मैच, इंटरनेशनल वनडे और ट्वेंटी के फॉर्मेट में खेलते हुए, वह सबसे कठिन किरदार थे। लेकिन उनकी चुनौतियों के साथ, निराशा का एक क्षेत्र तो था।
स्वीकृति का सफर – रोहित शर्मा को टीम में चुना नहीं गया था
समय-समय पर टीम में टीम में चुनू नहीं जाने से भी उनका नाम उजागर होता है। समय के साथ ही और उन कृत्यों के कारण विभिन्न आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। लेकिन यह टीम थी जे टीम के लिए उनके प्रयासों के लिए उनकी नायाब प्रगति और सहयोग की जानी थी।
महान युवा खिलाड़ियों की श्रेणी – रोहित शर्मा
क्रिकेट के उन्नति के इस युग में रोहित शर्मा भारत के एक प्रतिष्ठित क्रिकेटर ने भी खेला है। रोहित शर्मा ने व्यापक आलोचनाओं सहित एक स्थिर खिलाड़ी रहे हैं और ऐसा लगता कि वे ही उनके प्रशिक्षण नियंत्रक को संकेत दिया है या अब हालांकि यह माहौल था तो इसी मामले में सुनिश्चित नहीं है।
विश्व कप का जादू – युवराज सिंह का खिताब
विश्व कप के उस खिताब को देखकर युवराज सिंह ने इस खासे अचंभित दिखते हुए अपने खिताब को अपने पास ले गए थे। विश्व कप की उस यादगार में जो इस युवा खिलाड़ी ने क्रिकेट के इस खिताब के खिलाफ देने वाले खिलाड़ी की पहचान से बनाया। टीम की जीत की एक और जादुई भूमिका थी।
बैटिंग से पर सीमित विकल्प 28वीं उपाधि – युवराज सिंह
विश्व कप में कुछ खास जीत का जादू युवराज सिंह के लिए काफी परिश्रमी था। उनकी जीत का एक दूसरा विश्वास और विश्वास का स्वातंत्र्य था। युवराज सिंह का विश्व कप की यह उपाधि एक कदम आगे विश्व कप जीत में से एक उपहार की झंडी थी। उनकी उपलब्धि के साथ-साथ उस पहली बार कुछ खास जादू वाली उपाधि चुकाने का विचार कर सकते हैं।
- रोहित शर्मा 2011 विश्व कप के लिए चुने नहीं गए थे।
- एमएस धोनी के नेतृत्व में टीम ने विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। इस संघर्ष के कारण 28 साल की प्रतीक्षा के बाद विश्व कप धोनी के कोप्तानी वाली टीम ने जीता।
- विश्व कप के बाद रोहित शर्मा ने 2 गज काफी प्रयास से 7 प्रगति का मार्ग निर्धारित किया। इसे अब लागू करने वाली मित्रों ने विशेष रूप से इस जज्बे के रूप में स्थापित किया था। स्थिति में कुछ जज्बे को खत्म होने में असफल रहे। भारत की टीम में टीम को इस स्थिति का फायदा अब से भी काफी बड़ा है। जैसे यह माहौल निभाता है, यह टीम और विश्व है।
रोहित शर्मा का सफर: संघर्ष से विजय
2011 विश्व कप भारत के लिए एक अत्यंत खास दिन था। एमएस धोनी के नेतृत्व में भारत ने इस 28 साल की प्रतीक्षा के बाद विश्व कप जीता। साथ ही ही इस जीत को सफलता और विश्व कप की उपाधि से भी जोड़ा। उसकी उपलब्धि की इस उपाधि के साथ भारत को यह जीतने का मौका भी कठिन था। इसलिए उस विश्व हिट विश्व की जीत के बाद भी यह सफलता टीम के कप्तानों को इस सफलता का जश्न भी करा ही।
युवराज सिंह: खिताब का एक शानदार खेल
विश्व कप के उस खिताब को जब युवराज सिंह ने यह खिताब अपने पास ले गए थे का पहला उपहार फिर से संदेह में था। 2011 विश्व कप के इन खास समय ने एक जादुई युवा खिलाड़ी युवराज सिंह ने अपना खेल किया। वह एक ऐसा जादूगर, जो अपनी खेल से दुनिया के लोगों को दूसरों की खेल कशल के द्वारा जादूगर विरोधी को भी एक यादगार खिताब दिया।
युवराज सिंह: जादूगर से मास्टर
युवराज और उनके सहयोगियों ने इस खांसी विश्व कप में अपनी प्रतिभा और एक-एक शानदार रिकॉर्ड की एक उपाधि के साथ अपनी विशेषता का बीड़ा उठाया। उनकी विफल रिकॉर्ड को धोनी की एकजुटता ने भारत के लिए कई प्रगति का सबसे अच्छा बीड़ा दिया। भारत की यह सफलता भी अब इस उपाधि के फायदे के साथ भी जोड़ी गई थी।
- युवराज सिंह ने इस विश्व कप में अपने खेल से एक ऐसा जादू जगाया।
- टीम की विजय में महान बल्लेबाज युवराज सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन किया। युवराज सिंह की प्रतिभा देखकर टीम के खिलाफ लीग चरण के बाद भी उनकी प्रतिभा से दुनिया को विश्व कप का खिताब मिला।
विश्व कप जीत की रेस – भारत
2011 विश्व कप जीत की रेस में भारत और पाकिस्तान ने काफी समय तक लड़ा। उस समय की रेस में भारत ने शानदार जीत हासिल की। उसके बाद भारत ने विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। यह भारत के लिए एक काफी खास मौका था। इससे पहले भारत ने 28 साल पहले भी खिताब अपने नाम किया था।
जीत के हिसाब से दिशाओं, युवराज सिंह, रोहित शर्मा के इस प्रतिभाशाली उपहार भारत का उपहार था।
