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जल्दबाजी पड़ी भारी: चोटों के साथ हेज़लवुड का संघर्ष
क्रिकेट में जब कोई खिलाड़ी 30 की उम्र पार कर लेता है, तो उसके शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं। जोश हेज़लवुड, जो अब 35 वर्ष के हैं, ने हाल ही में इस कड़वे सच को स्वीकार किया है। आरसीबी के इस दिग्गज तेज गेंदबाज ने बताया कि पिछले पांच महीनों का समय उनके लिए किसी बुरे सपने जैसा था। चोटों के एक के बाद एक सिलसिले ने उन्हें खेल से दूर रखा, और जब उन्होंने जल्दबाजी में वापसी की कोशिश की, तो स्थिति और बिगड़ गई।
हेज़लवुड की मुश्किलों की शुरुआत पिछले साल नवंबर में एक शेफील्ड शील्ड मैच के दौरान हुई, जहाँ उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी का सामना करना पड़ा। लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब वह रिहैब के दौरान जल्द से जल्द मैदान पर लौटना चाहते थे। इस जल्दबाजी के कारण उन्हें अकिलीज़/टेंडन (Achilles/tendon) की समस्या हुई और उसके बाद काफ मसल (calf muscle) में टीयर आ गया।
इन चोटों के कारण उन्हें न केवल एशेज (Ashes) और टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट्स से बाहर रहना पड़ा, बल्कि IPL 2026 के शुरुआती मैचों में भी वह अपनी टीम का साथ नहीं दे सके। हेज़लवुड का मानना है कि यह सब “चोटों का सम्मान न करने” और रिकवरी के समय को नजरअंदाज करने का नतीजा था।
रिकवरी का सबक: ‘इंटेन्सिटी’ और धैर्य का महत्व
शनिवार को दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ घरेलू मैच से पहले बात करते हुए हेज़लवुड ने कहा, “हर प्रोफेशनल एथलीट जानता है कि वापसी के लिए कितनी मेहनत लगती है। इस बार मुझे यह समझ आया कि रिकवरी के समय का सम्मान करना कितना जरूरी है, खासकर जब आप 30 की उम्र के गलत छोर पर हों।”
उन्होंने बताया कि वह चौथे या पांचवें एशेज टेस्ट या वर्ल्ड कप में खेलने की इतनी जल्दी में थे कि उन्होंने अपने शरीर को पर्याप्त समय नहीं दिया। हालांकि, अब वह पूरी तरह फिट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी वापसी से पहले ट्रेनिंग में अतिरिक्त सत्र (extra sessions) लिए ताकि वह आईपीएल के उच्च दबाव और तीव्रता (intensity) का सामना कर सकें।
- राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ: हेज़लवुड ने वापसी की और 2 विकेट लिए, लेकिन वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल जैसे बल्लेबाजों ने उन्हें काफी निशाना बनाया, जिससे उन्होंने 44 रन लुटाए।
- मुंबई इंडियंस के खिलाफ: योजना के अनुसार वह इस मैच से बाहर रहे।
- लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ: यहाँ उन्होंने शानदार वापसी की और महज 20 रन देकर 1 विकेट झटका।
गेंदबाजी की रणनीति: ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल
आज के दौर में जहाँ अधिकांश गेंदबाज स्लोअर बॉल और विविधताओं (variations) पर निर्भर रहते हैं, वहीं जोश हेज़लवुड अपनी पुरानी शैली पर भरोसा करते हैं। वह टेस्ट मैच की तरह हार्ड लेंथ पर गेंदबाजी करना पसंद करते हैं और बल्लेबाजों को उनकी अजीब उछाल (awkward bounce) से परेशान करते हैं।
हेज़लवुड ने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा, “मेरे पास शायद बहुत बेहतरीन स्लोअर बॉल नहीं है, इसलिए मेरा लक्ष्य बल्लेबाजों को भ्रमित करना होता है। मैं उन्हें दिखाता हूँ कि मैं स्लोअर बॉल फेंकने वाला हूँ और फिर तेज गेंद डाल देता हूँ, या कभी-कभी वास्तव में स्लोअर बॉल फेंकता हूँ। यह मैदान पर एक तरह का चूहे-बिल्ली का खेल है।”
वह यह भी मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत सही लेंथ हिट करना और गेंद को हवा में न उछालना है, जिससे बल्लेबाजों के लिए उन्हें हिट करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही, वह आरसीबी के अन्य गेंदबाजों से भी नई तरकीबें सीख रहे हैं, जिससे टीम का गेंदबाजी आक्रमण संतुलित बना रहे।
IPL में रनों की बारिश: क्या गेंदबाजों का दबाव कम हुआ है?
इस सीजन में रनों का अंबार लगा हुआ है। 23 पूर्ण मैचों में से 21 बार स्कोर 200 के पार गया है और अब तक 424 छक्के लगाए जा चुके हैं। आम तौर पर माना जाता है कि इससे गेंदबाजों पर दबाव बढ़ता है, लेकिन हेज़लवुड का नजरिया बिल्कुल अलग है।
उनका तर्क है कि जब 230 रनों का स्कोर एक सामान्य बात बन जाती है, तो दबाव बल्लेबाजों पर बढ़ जाता है। हेज़लवुड के अनुसार, “अगर आप एक बल्लेबाज को 6 गेंदों में सिर्फ 2 रन देते हैं, तो वह बल्लेबाज भारी दबाव में आ जाता है क्योंकि उससे उम्मीद की जाती है कि वह बड़ी पारी खेले। आप देख सकते हैं कि वह खिलाड़ी बीच मैदान में घबरा जाता है क्योंकि उसे गैप नहीं मिल रहे होते हैं।”
निष्कर्ष के तौर पर, जोश हेज़लवुड की यह वापसी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी परिपक्वता की कहानी है। उन्होंने सीखा है कि शरीर की सुनना कितना जरूरी है और खेल के बदलते स्वरूप में कैसे खुद को ढालना है। अब देखना यह होगा कि उनकी यह ‘हार्ड लेंथ’ रणनीति आरसीबी को खिताब की ओर ले जाने में कितनी मददगार साबित होती है।
